Vo meri aankho ke samne kisi or ki ho rahi thi poetry by Goonj Chand | vo meri aankho ke samne kisi kr ka ho rha tha Goonj poetry

Vo meri aankho ke samne kisi or ki ho rahi thi poetry by Goonj Chand


वह मेरी आंखों के सामने किसी और का हो रहा था 

Vh mere aakho k samne kise or ka ho rha tha 



की चौखट पर हम उसकी अपना दिल लेकर पहुंचे ही थे ..२

कि देखा वह अपना दिल किसी और को दे रहा था 

और अब हम किस मुंह से करते अपने प्यार का इज़हार ..२

वह मेरी आंखों के सामने किसी और का हो रहा था

Ki chokhat or hm oski apna dil leker phucha he the

Ki dekha vh apna dil kise or ko de rha tha 

Or ab am kis muh se krethe apne pyar ka izhar 

Vh mere aakho k samne kise or ka ho rha tha


 

कि कुछ घंटों की देरी थी या मिनटों का फासला

जो आज किसी और का हो रहा था कभी उसका भी था हमसे वास्ता ..२ 

कि आज फिर मुझे अपनी किस्मत पर अफसोस हो रहा था

और वह मेरी आंखों के सामने किसी और का हो रहा था

Ki kuch gnto ki deri thi ya Minto ka fasla 

Jo aaj kise or ka ho rha tha kabhi oska bhi tha hmse vastha

Ki aaj fir muge apni kismath or afsos ho rha tha 

Or vh mere aakho k samne kise or ka ho rha tha 



कि पहुंच तो गए थे हम अपनी मंजिल के तख्त पर

पर नहीं पहुंच पाए थे हम आज भी वक्त पर ..२

वक्त की सही अहमियत का अंदाजा हमें आज हो रहा था

और वह मेरी आंखों के सामने किसी और का हो रहा था

Ki phuch tho gye the apni manjil k thakth pr 

Pr nhi phuch paye the aaj bhi vkth pr 

Vkth ki sahi ahmiyat ka andaja hme aaj ho rha tha 

Or vh mere aakho k samne kise or ka ho rha tha 


कि फिर हुआ कुछ यूं कि उसने मुझे देख लिया ..२

और मुझे अपने पास बुला कर मुझसे ही पूछ लिया 

कैसी लगी मेरी पसंद तुम्हें , वह मुझसे यह सवाल कर रहा था

और वह मेरी आंखों के सामने किसी और का हो रहा था

Ki fir hua yu ki osne muge dekh liya 

Or muge apne pass bula ke mugse he puch lea 

Kise lgi mere psnd thumhe , vh mujse yh swal kr rha tha 

Or vh mere aakho k samne kise or ka ho rha tha 


की चौखट पर हम उसकी अपना दिल लेकर पहुंचे ही थे  

कि देखा वह अपना दिल किसी और को दे रहा था 

और अब हम किस मुंह से करते अपने प्यार का इज़हार 

वह मेरी आंखों के सामने किसी और का हो रहा था


Ki chokhat or hm oski apna dil leker phucha he the

Ki dekha vh apna dil kise or ko de rha tha 

Or ab am kis muh se krethe apne pyar ka izhar 

Vh mere aakho k samne kise or ka ho rha tha

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