Har Dafa Tumpar Marte Rahenge by Abhik Tiwari | Best Love Poetry By Abhik Tiwari

Har Dafa Tumpar Marte Rahenge by Abhik Tiwari


की तरब से हर बार मेरी हुई

कि वह जीत गया और हार मेरी हुई ..२

मैंने सुना है बहुत अमीर उस मोहल्ले में 

फिर मुसीबतों  मैं वह मेरी क्यों कर्जदार हुई

Ki tlab se hr baar mere hui 

Ki vh jith gya or haar mere hui 

Mene suna hai bhut ameer os mohhle mai 

Fir vh musibato mai vh mere kyo karjdar hui 


फिर एक शाम हम नशे में थे कुछ बातों के दबदबे में थे 

मेरी आंखों से फिर आंसू निकले उसके आंखे वफादार मेरी हुई 

Fir ek sham hm nashe mai the kuch batho k dbdbe mai the 

Mere aakho se fir aasu nikle osk aakhe vfadaar mere hui 


कि मैं देखूं तुम्हें तो घबराना नहीं रहना साथ मेरे शर्माना नहीं

और एक वादा जो किया एक दूजे से हमने 

अगर मैं ना निभाऊं तो तुम भी निभाना   नहीं

कि एक रोज जब तुम मुझसे थक जाओ ..२

और मैं भी तुमसे थक जाऊं , हम होने वाले हैं अलग यह बताना नहीं

Ki mai dekhu thumhe tho gbrana nhi rhna sath mere sharmana nhi 

Or ek vaad jo kiya ek duje se hmne 

Agar mai na nibhao tho thum bhi nibhana nhi 

Ki ek roj jb thum mujse thak jao ..2

Or mai bhi tumse thak jao , hm hone vale hai alag yh btana nhi 


मैं शब्दों शायर हूं समुंदर पार रहता हूं

तेरी ही गलियों के आर पार रहता हूं 

और जो मोहब्बत में अच्छे हैं वह हद में रहें

मैं मोहब्बत में बुरा हूं हद पार रहता हूं

Mai shbdo shayer hu samunder paar rhtha hu 

Tere he gliyo k aar paar rhtha hu 

Or jo mohhbath mai aache hai vh hd mai rhe 

Mai mohhbath mai bura hu HD paar rhtha hu 


और जो मोहब्बत में अच्छे हैं वह हद में रहें

मैं मोहब्बत में बुरा हूं हद पार रहता हूं

और यह मसले जिस्म जहान वह रूहानी कर रही है

मैं उसी कमरे में किराएदार रहता हूं 

कि फिर किनारों पर सफर जो हम करते रहेंगे

हर दफा तुम पर ही मरते  रहेंगे 

और यह तेज हवाएं बनने नहीं देंगि घर हमारा

इन दरियाओ पर मिट्टी यूं ही भरतें रहेंगे

Or jo mohhbath mai aache hai vo hd mai rhe 

Mai mohhbath mai Bora hu HD paar rhtha hu 

Or yh msle jism jhaan vh ruhani kr rhi hai 

Mai ose kmre mai kirayedaar rhtha hu 

Ki fir kinaro pr star jo hm krethe rhenge 

Hm hr dfa thum pr he merthe rhenge 

Or ye tej Havaye  bnne  nhi degi gr hmara 

En driyao pr mitti yu he bhrthe rhenge 


वह जिद पर खड़ी है हाथों में रेत लेकर

उसे नहीं पता  रेत हाथों में फिसलती है

कश्ती बनाना हुनर है उसका

उसे नहीं पता नाव   पानी में चलता है

कि वह  आती है फिर उस मगरूरए जहां 

से जहां उसे हर चीज सिखानी पड़ती है

कि मैं चिल्ला ना दूं उस पर इस बात से बहुत डरती है

Ki vh jid pr khadi hai haatho mai reth leker 

Ose nhi patha reth haatho mai fisalthi hai 

Kashthi bnana hunar hai iska 

Ose nhi patha naav pani mai chletha hai 

Ki vh aathi hai fir is mgrur jha se 

Jha ose hr chiz sikhani pdthi hai 

Ki mai chilla na du ospr es bath se darthi hai 


कि समुंदर से उसका तजुर्बा पुराना है

वह जब भी देखें मुझे हर बार मुस्कुराना है

Ki smudar se oska tjurba porana hai 

Vh jb bhi dekhe muge hr baar muskurana hai 


कि किसी बात पर हमारी बहस हो जाए ..2

कि उसका जीतना है और मेरा हार जाना है ..२ 

की तलिसमे  हार मैं हुस्न दिखाई नहीं देते

मुझे घायलों को मरहम लगाना होता है

कि तेरे नाम की जंग कब खत्म होगी हम सिपाहियों को घर भी जाना होता है

Ki kise bath pr hmari bhas ho jaye 

Ki oska jitna hai or mera haar jana hai 

Ki talisme haar mai husn dikhai nhi dethe 

Muge gaylo ko mram lgana hotha hai 

Ki tere naam ki jang kb khtham hogi hm sipahiyo ko gr bhi jana hotha hai

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