KUCH IS TARAH SE MUJHKO SATAYA GAYA Poetry | GOONJ CHAND Poetry

KUCH IS TARAH SE MUJHKO SATAYA GAYA Poetry by GOONJ CHAND

KUCH IS TARAH SE MUJHKO SATAYA GAYA

हाथों में दर्द लिये गमों के पन्ने बिछा उन पर अपने जज्बात लिखती हूं जी हां मैं वही हूं जो हर बेवफा शक्स की औकात लिखती हूं।


मरने के बाद भी मुझको रुलाया गया कुछ इस तरह से मुझको सताया गया...

मरने के बाद भी मुझको रुलाया गया कुछ इस तरह से मुझको सताया गया...

और गले लग लग जाए उसको सहारा दे रहे थे लोग ..

और गले लग लग जाए उसको सहारा दे रहे थे लोग ..

जिसकी वजह से मुझे कब्र में दफनाया गया।


कि कुछ इस तरह से सताया गया इस तरह से उसको मनाया गया मेरा नाम ले लेकर उसको खाना खिलाया गया...

कि कुछ इस तरह से सताया गया इस तरह से उसको मनाया गया मेरा नाम ले लेकर उसको खाना खिलाया गया...

और इस बात से अनजान थे लोग वहां कि उसे बेवफा के हाथों से मुझे जहर पिलाया गया। 

कुछ इस तरह से मुझको सताए गया कि मेरे मरने के बाद में अर्थी को इस तरह सजाया गया उस बेवफा को ना चाहते हुए भी रूलाया गया 

उड़ रकिब  के साथ मिलकर की थी साजिश उसने...

भरी महफिल में उसे उसका भाई बताए गया।


कुछ इस तरह से मुझको सताए गया कि... सब लोग चले गए तो नाटक खत्म, 

फिर सबके जाने के बाद मेरी मौत का जश्न मनाया गया,

फिर सबके जाने के बाद मेरी मौत का जश्न मनाया गया,..

मेरी अर्थी में चढ़े फूलों से मेरे घर को सजाया गया  और 

जिस रकीब को अपना समझ रही थी...

जिस रकीब को अपना समझ रही थी...

उसी रकीब के हाथों उसे भी जहर पिलाया गया।


कुछ इस तरह से मुझको सताया गया एक बार फिर मुझे उस से रूबरू कराया गया

इस बार वह फूल उसकी अर्थी पर सजाया गया और मोहब्बत मैंने बड़ी शिद्दत से कर ली थी शायद, और मोहब्बत मैंने बड़ी शिद्दत से कर लेते शायद उसका मुकबरा मेरे मुकबरे के नजदीक लगाया गया ।

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