Poetry- Ye Kaisi Mohabbat by Swastika Rajput poetry | swastika rajput shayari status | स्वास्तिका राजपूत की शायरी

Swastika rajput shayari

This is amazing poetry by Swastika Rajput. One of the must-reads on this website. Aapko pyar to hua hi hoga agar nahi hua to is poetry ko pdhiye pyar ki kuch gahrai to samajh hi jaoge- Ye Kaisi Mohabbat - roye agar shaks koi poetry

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Poetry by Swastika Rajput



Ye Kaisi Mohabbat,


Jane kaisi nazar thi unki shayari

Youn to Duniya bhar me mere pyar ke kisse mashoor ho gye...

 Youn to Duniya bhar me mere pyar ke kisse mashoor ho gye...

magar main juban pr unka nam bhi na le saku to ye kasi mohabbat...

 यूं तो दुनिया भर में मेरे प्यार के किस्से मशहूर हो गए... 

यूं तो दुनिया भर में मेरे प्यार के किस्से मशहूर हो गए... 

मगर मैं जुबान पर उसका नाम भी ना ले सकू तो ये कैसी मोहब्बत... 


Youn to Duniya bhar me mere pyar ke kisse mashoor ho gye...

 Youn to Duniya bhar me mere pyar ke kisse mashoor ho gye...

magar main juban pr unka nam bhi na le saku to ye kasi mohabbat...

or vo ghar se ladkr aaye meri mahfil me mujhe sunne...

or vo ghar se ladkr aaye meri mahfil me mujhe sunne...

main unhe gale bhi na lag saki ye kasi sohrat.


 यूं तो दुनिया भर में मेरे प्यार के किस्से मशहूर हो गए... 

यूं तो दुनिया भर में मेरे प्यार के किस्से मशहूर हो गए... 

मगर मैं जुबान पर उसका नाम भी ना ले सकू तो ये कैसी मोहब्बत... 

और वो घर से लड़कर आए मेरी महफ़िल में मुझे सुनने... 

और वो घर से लड़कर आए मेरी महफ़िल में मुझे सुनने... 

मैं उन्हें गले भी न लगा सकी ये कैसी शोहरत 


ke gujru main unki galio se...

ke gujru main unki galio se...ke kahi dikhjaye vo mujhe bs ek najar...

ke gujru main unki galio se...ke kahi dikhjaye vo mujhe bs ek najar...

darvaje pr unki namojudgi dekh udas ho jati meri nigahe
vo mujhe khidkiyon se jhaka karte the, thi main isse bekhabr.


के गुजरू मैं उनकी गलियों से... 
के गुजरू मैं उनकी गलियों से...के कहीं दिखजाए बस एक नजर...  
के गुजरू मैं उनकी गलियों से...के कहीं दिखजाए बस एक नजर...  
दरवाजे पर उनकी नामौजूदगी देख उदास हो जाती मेरी निगाहे 
वो मुझे खिड़कियों से झाका करते थे, थी मैं इससे बेखबर। 

Mere gamo ki numaish na kare koi 
mere ishq ki rusvai na kare koi... 
Mere gamo ki numaish na kare koi 
mere ishq ki rusvai na kare koi...
main jo hu vo unki badolat hu mere dard ki dava na kare koi 

मेरे गमो की नुमाइश ना करे कोई 
मेरे इश्क़ की रुसवाई ना करे कोई... 
मेरे गमो की नुमाइश ना करे कोई 
मेरे इश्क़ की रुसवाई ना करे कोई... 
मैं जो हूँ वो उनकी बदौलत हूँ मेरे दर्द की दवा ना करे कोई 

Ye kurbato ki duri bhi ek roj khatm na ho jaye,
na bahne vale ashq ek-din mujhe rula na jayen 
or ye ulfat, rafakat, furkat to dur ki bat janab...
ke vo takalluf ke bad ek roj hmari jaan na le jayen.
ये क़ुर्बतों की दूरी भी एक रोज ख़त्म  जाए,
ना बहने वाले अश्क़ एक दिन मुझे रुला ना जाएं 
और ये उल्फत, रफाकत, फुरकत तो दूर की बात जनाब...
के वो तकल्लुफ के बाद एक रोज हमारी जान ना ले जाएँ।

ke khafa hai aaj vo hamse ye bat sochke...
ke khafa hai aaj vo hamse ye bat sochke...
aagaye hai kai chahne vale hamari in galio me..
vo kya jane..
ke vo kya jane...ye dil kisi pr aajaye aisi sabme bat nahi,
or hamse bada aashiq unka koi or nahi...
or kaha unhone ke tumse dil lagana hame mahanga pad gya...
or kaha unhone ke tumse dil lagana hame mahanga pad gya...
vo kya jane..
ke vo kya jane... ke vase to is dil ko koi khareed na saka 
lekin agar khareedar vo hai to hamse jada sasta is bajar me koi or nahi.
के खफा है आज वो हमसे ये बात सोचके...
के खफा है आज वो हमसे ये बात सोचके...
आगाए है कई चाहने वाले हमारी इन गलियो मे...
वो क्या जाने...
के वो क्या जाने... ये दिल किसी पर आजाए ऐसी सबमे बात नहीं,
और हमसे बड़ा आशिक उनका कोई ओर नहीं...
और कहा उन्होने के तुमसे दिल लगाना हमे महंगा पड़ गया...
और कहा उन्होने के तुमसे दिल लगाना हमे महंगा पड़ गया...
वो क्या जाने...
के वो क्या जाने... के वासे तो इस दिल को कोई खरीद न सका 
लेकिन अगर खरीदार वो हैं तो हमसे जादा सस्ता इस बाजार मे कोई और नहीं।
 
Roye agar saksh koi..
Roye agar saksh koi..
to vo kamjor kahlata hai kon jane is duniya me koi kisi ke lie kyu rota hai,
agar itna hi aasan hota rona...
ke agar itna hi aasan hota rona...to kabhi kisi saksh ka dil na tuta karta..
ke bura lagne or rone me fark hota hai janab....
youn ashko ko har kisi pr bahaya nahi jata

रोए अगर शक्स कोई...
रोए अगर शक्स कोई...
तो वो कमजोर कहलाता है कौन जाने इस दुनिया मे कोई किसी के लिए क्यू रोता है,
अगर इतना ही आसान होता रोना...
के अगर इतना ही आसान होता रोना ...तो कभी किसी शक्सका दिल ना टूटा करता...
के बुरा लगने और रोने मे फर्क होता है जनाब...
यू अशकों को हर किसी पर बहाया नहीं जाता   

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